Sunday, July 29, 2007

मैं नही पीता


मैं नहीं पीता

किंतु

मेरे दोस्त बताते हैं कि

शराब गम गलत करती है.

भला

गम भी कोई गलत करने की चीज़ है ?


सोचता हू मैं.


और

सोचते ही सोचते ,

इकट्ठा कर लेता हूं,

गम का सामान.


कुछ यादें,

कुछ अनुभवों की कडुवाहट,

कुछ टूटे सम्बन्धों का कसैलापन,

कुछ नये रिश्तों के सभावित मसौदे,


कुछ सहज स्वीकृत धोखे,

कुछ पूर्व मित्रों के जताये एहसानात,

कुछ गुनगुने विश्वासघात.


ज़ाडों की कुछ ठंडी रातें, चन्द रेगिस्तानी दिन

कुछ लिजलिजे आदर्श.



तह करके,

सजाके रख लेता हू अपने पास,

ऐसे,

जैसे रखता है कोई पिता,

अपने दूर परदेश गई ब्याहता बिटिया के

बचपन के खिलोने.

वाह!

गम भी कोई गलत करने की चीज़ है ?

3 comments:

अनूप शुक्ला said...

ये सामान गम गलत करने के लिये जुटाये जाते हैं!

Udan Tashtari said...

इतने सारे प्रयत्नों को एक पैकेज डील में-एक पैग में सेम फिलिंग :)

-लिखा बढ़िया हैं.

मोहिन्दर कुमार said...

गम को भुलाने के लिये... एक गम और न पाल
पहले ही बहुत बोझ है दिल पर,तू एक और न डाल