कानपुर , बम्बई, हैदराबाद, कलकत्ता में भटकने के बाद 1981 से दिल्ली में प्रवास. पहले आर्थिक अनुसन्धान व शिक्षण मे, फिर विज्ञापन जगत में कुछ वर्ष बिताने के बाद अनेक वर्षों तक स्वतंत्र बाज़ार अनुसन्धान सलाहकार,फिर राजनीति....फिर वापस विज्ञापन जगत मे. उसके बाद भट्कन पत्रकारिता की गलियों में. आकाशवाणी हेतु अनेक कार्यक्रमों की प्रस्तुति,वापस शिक्षण व अध्यापन.सम्प्रति एक प्रबन्धन् शिक्षा संस्थान में सांख्यिकी व बाज़ार अनुसन्धान ( Statistics & Marketing Research )विषय में प्रोफेसर्,लिखने लिखाने का शौक 30 वर्षों से. लगभग सभी हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में 500 से अधिक रचनायें प्रकाशित. हिन्दी अकादमी दिल्ली के सहयोग से दो काव्य संग्रह 'नक़ाबों के शहर में' तथा 'चीखता है मन' प्रकाशित. कवि सम्मेलनों मे शिरकत्
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