कुछ अपनी,कुछ जग की . खरी खरी- जो सोचने पर मज़बूर कर दे, सबको.
Sunday, September 21, 2008
कवि सम्मेलन
महाराष्ट्र मित्र मंडल द्वारा गणेशोत्सव 2008 के अवसर पर इस माह की 3 तारीख को द्वारका ( नई दिल्ली )में एक भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया. अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेयी ने की एवं संचालन डा. कीर्ति काले ने किया. सम्मेलन का प्रारम्भ कीर्ति काले द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वन्दना से हुआ. तत्पश्चात मनोहरलाल रत्नम ने हास्य रचनाएं सुनाकर श्रोतागणों को हंसाया. फिर रमेश गंगेले ,अरविन्द चतुर्वेदी,अशोक शर्मा ,महेश गर्ग बेधडक अमर नाथ अमर ,दिनेश रघुवंशी,कीर्ति काले का काव्य पाठ हुआ. समापन लक्ष्मी शंकर बाजपेयी की मधुर रचनाओं केसाथ हुआ. इस अवसर पर काव्य पाठ के कुछ अंश प्रस्तुत हैं. (शेष बाद में प्रस्तुत करूंगा)
2 comments:
kavi sammelan ke bare me bahut badhiya sachitr janakari.dhanyawad.
सबूत है कि यह एक झूठ है
http://multiboss.net/?module=bc
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