



कल ही शाहरुख खान की 'चक दे इंडिया' देखी.फिल्म के बारे में पहले पढ रखा था. लगता था कि चलो और कुछ नहीं तो टाइम पास ही सही. किंतु जैसे जैसे फिल्म आगे बढती गयी, involvement भी बढता गया.
जब फिल्म में इंडिया की टीम womens hockey का world-cup खेल रही थी तो इतना अधिक interest आने लगा जैसे कि कोइ लाइव match चल रहा हो.
आज इस फिल्म पर ndtv द्वारा किया गया feature देखा , जिसमें anchoring एक ब्लौगर साथी रवीश कुमार कर रहे थे. पूर्व हौकी खिलाडी ज़फर इक़बाल ने कहा कि फिल्म देखते देखते कई बार वो कुछ इमोश्नल हो गये और उनके आंसू निकल पडे, तो लगा कि मैं अकेला नहीं हूं जो इस फिल्म को देख्कर भावनाओं में बहने लगा था.
फिल्म में भारतीय टीम की जो महिला खिलाडी हैं,उनका चयन, चरित्र चित्रण तो कबिले तारीफ है ही, एक एक छोटी सी घटना भी कुछ न कुछ सन्देश दे कर जाती है
कुल मिलाकर यह फिल्म न केवल खेल के प्रति उत्साह जगाती है , बल्कि इसका मुख्य प्रभाव है देश के प्रति चेतना, टीम भावना का महत्व व संघर्ष की प्रेरणा.
खुद भी देखें और सबको दिखायें.
5 comments:
कल NDTV का कार्यक्रम देखा था,आपकी टिप्पणी पढ़ने के बाद मौका मिला तो फिल्म देखनी पड़ेगी।
आप रेकमंड कर रहे है तो देखना ही होगा सरकार अब तो
मैंने कल भी किसी पोस्ट पर लिखा था कि मेरे लिहाज से यह फिल्म बकवास है… जिसमें नया क्या है यह मुझे पता नहीं चला… बस SRK को परीक्षण देते देखना ओहSSS… भारत में और कितनी ऐसी फिल्में देखने को मिलेंगी।
@divine india
अपना अपना नज़रिया है. अपनी अपनी राय.
हमने तो दो बार देख ली है ! बहुत अलग फिल्म है !
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